चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म का एक पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे पूरे भारत में बड़े श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाया जाता है। यह पर्व माँ दुर्गा की आराधना, शक्ति साधना और आत्मशुद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान नौ दिनों तक देवी दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है और उपवास रखा जाता है।
चैत्र नवरात्रि 2025 की तिथियां (Chaitra Navratri 2025 Date & Time)
इसकी शुरुआत 30 मार्च 2025 (रविवार) से होगी और इसका समापन 6 अप्रैल 2025 (रविवार) को राम नवमी के दिन होगा।
दिनांक | दिन | तिथि | पूजन देवी | दिन का रंग |
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30 मार्च 2025 | रविवार | प्रतिपदा | माँ शैलपुत्री | नारंगी |
31 मार्च 2025 | सोमवार | द्वितीया | माँ ब्रह्मचारिणी | सफेद |
1 अप्रैल 2025 | मंगलवार | तृतीया | माँ चंद्रघंटा | लाल |
2 अप्रैल 2025 | बुधवार | चतुर्थी | माँ कूष्मांडा | रॉयल ब्लू |
3 अप्रैल 2025 | गुरुवार | पंचमी | माँ स्कंदमाता | पीला |
4 अप्रैल 2025 | शुक्रवार | षष्ठी | माँ कात्यायनी | हरा |
5 अप्रैल 2025 | शनिवार | सप्तमी | माँ कालरात्रि | ग्रे |
6 अप्रैल 2025 | रविवार | अष्टमी | माँ महागौरी | बैंगनी |
7 अप्रैल 2025 | सोमवार | नवमी | माँ सिद्धिदात्री | पीकॉक ग्रीन |

चैत्र नवरात्रि का महत्व (Significance of Chaitra Navratri 2025)
1. धार्मिक महत्व
- यह पर्व माँ दुर्गा की शक्ति की उपासना के लिए समर्पित है।
- हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र नवरात्रि के पहले दिन ही नया संवत्सर (हिंदू नववर्ष) शुरू होता है।
- भगवान श्रीराम का जन्मदिन (राम नवमी) भी इसी नवरात्रि के अंतिम दिन मनाया जाता है।
2. आध्यात्मिक महत्व
- नवरात्रि में देवी उपासना से मन, शरीर और आत्मा की शुद्धि होती है।
- उपवास और ध्यान से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।
- नकारात्मक ऊर्जा को हटाकर सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
चैत्र नवरात्रि 2025 की पूजा विधि (Chaitra Navratri Puja Vidhi)
1. कलश स्थापना (Ghatasthapana Vidhi)
- नवरात्रि के पहले दिन प्रातः काल स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल पर मिट्टी के पात्र में जौ (जवारे) बोकर उसमें जल से भरा कलश रखें।
- कलश पर आम के पत्ते रखें और उसके ऊपर नारियल रखें।
- देवी दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- माँ दुर्गा की आरती करें और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
2. नौ दिनों की पूजा विधि
- रोजाना घी या तेल का दीपक जलाएं और देवी दुर्गा का पाठ करें।
- दुर्गा चालीसा और सप्तशती का पाठ करें।
- व्रत रखने वाले फलाहार करें और सात्विक भोजन का सेवन करें।
- कन्या पूजन और हवन का आयोजन करें।
चैत्र नवरात्रि में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा (9 Forms of Goddess Durga in Chaitra Navratri)
दिन | माँ दुर्गा का स्वरूप | महत्व | पूजा विधि | लाभ |
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पहला दिन | माँ शैलपुत्री | पर्वतराज हिमालय की पुत्री, शक्ति स्वरूपा | सफेद फूल, दूध से बनी मिठाई, शुद्ध घी अर्पित करें | मन की शांति और दृढ़ संकल्प |
दूसरा दिन | माँ ब्रह्मचारिणी | तपस्या, संयम और ज्ञान की देवी | चीनी, मिश्री, शहद, और दूध अर्पित करें | धैर्य और आत्मविश्वास में वृद्धि |
तीसरा दिन | माँ चंद्रघंटा | साहस और शौर्य की प्रतीक | केसर मिश्रित दूध, लाल फूल अर्पित करें | भय और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति |
चौथा दिन | माँ कूष्मांडा | सृष्टि की रचनाकार | मालपुए, शहद, लाल रंग की चीजें अर्पित करें | सेहत और समृद्धि की प्राप्ति |
पाँचवां दिन | माँ स्कंदमाता | ज्ञान और मोक्ष की देवी | केले, दूध, पीले फूल अर्पित करें | संतान सुख और बुद्धि-विवेक में वृद्धि |
छठा दिन | माँ कात्यायनी | विवाह बाधाओं को दूर करने वाली देवी | शहद, गुलाब के फूल, केसर अर्पित करें | विवाह संबंधी बाधाओं का नाश |
सातवाँ दिन | माँ कालरात्रि | बुरी शक्तियों और नकारात्मकता का नाश करती हैं | गुड़, लौंग, नीले फूल अर्पित करें | भय, शत्रु और मानसिक तनाव से मुक्ति |
आठवाँ दिन | माँ महागौरी | करुणा और शांति की देवी | नारियल, दूध, सफेद वस्त्र अर्पित करें | मन की शुद्धि और इच्छाओं की पूर्ति |
नवाँ दिन | माँ सिद्धिदात्री | सभी सिद्धियों को देने वाली देवी | काले तिल, नारियल, चंदन अर्पित करें | आध्यात्मिक उन्नति और इच्छाओं की पूर्त |
चैत्र नवरात्रि के व्रत नियम (Chaitra Navratri Vrat Rules)
✅ क्या करें?
- माँ दुर्गा की आराधना करें।
- सात्विक भोजन करें।
- जरूरतमंदों को दान दें।
❌ क्या न करें?
- मांस, मदिरा और नशे से दूर रहें।
- गुस्सा, झूठ और नकारात्मकता से बचें।
- तामसिक भोजन न करें।

राम नवमी 2025 (Ram Navami 2025)
चैत्र नवरात्रि के अंतिम दिन, 6 अप्रैल 2025 को राम नवमी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था। इस दिन विशेष रूप से पूजा-अर्चना, हवन और भजन-कीर्तन किया जाता है।
चैत्र नवरात्रि में कौन-कौन से विशेष उपाय करें?
- नवरात्रि में माँ दुर्गा को लाल फूल अर्पित करें।
- घर में नौ दिन तक अखंड ज्योति जलाएं।
- रात को देवी माँ के भजन करें।
- नवरात्रि के दौरान कन्या पूजन करें और उन्हें भोजन कराएं।
निष्कर्ष:
चैत्र नवरात्रि माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ समय है। यह पर्व आत्मशुद्धि, शक्ति और भक्ति का प्रतीक है। इस दौरान माँ दुर्गा की पूजा, उपवास और दान से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है। इस नवरात्रि को पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ मनाएं और माँ दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करें।
✨ आप सभी को चैत्र नवरात्रि 2025 की हार्दिक शुभकामनाएँ! 🙏